49. ईश तुम्ही
ईश तुम्ही-
ईश तुम्ही, जगदीश तुम्ही,
तुम हो जग के रखवारे।
चरण शरण में आये तुम्हारी,
तुम बिन कौन हमारे।। ईश
मात, पिता और भ्राता बंधू,
तुम ही सर्वस्व हमारे,
तुम्हारी कृपा के हम हैं इच्छुक,
तुम ही हमारे पालनहारे।। ईश
दुःख में हों या सुख में,
तुम ही को सदा पुकारें।
करुणा हस्त बढ़ा कर राखो,
तुमने सब संकट टारे।। ईश
जब जब संकट आन पड़े हम पर,
हम पहुंचे तुम्हारी द्वारे।
तब तब तुम हुए हो रक्षक,
तुमने कितने भिक्षुक टारे।। ईश
शरण में अपनी रख लो प्रभु,
अब तो हम जग से हारे।
अब कोई न दिखता सहारा,
हम छोड़े द्वार हैं सारे।। ईश
-कमला मायर