1. याचना, प्रेरक भाव/गीत
- याचना (प्रेरक भाव)
परम प्रभु की अनंत सृष्टि का ऐश्वर्य समस्त ब्रह्माण्ड में छाया है। सृष्टि की प्रत्येक वस्तु का सूक्ष्म अवलोकन करने पर परम पिता की हिरण्यमय सत्ता पर विश्वास दृढ हो जाता है। यह एक नितांत निष्काम कृति है। इस रचना में अपना थोड़ा सा योगदान देकर हम अपने को धन्य मानते हैं; मानो बहती गंगा में हाथ धोकर पुण्य लाभ कर रहे हों।
गंगा की उठती गिरती लहरों को देख कर मन में तरंग उठती है; प्रभु हमारे भी श्वासों को अपनी भक्ति लहरों में मिला दो, निर्मल निर्झर के छलकते मुक्ता कणों को देखकर मन कह उठता है मेरे प्राण भी इसमें मिला दो, मैं भी अपना समस्त प्रेम उस असीम एवं अदृश्य सत्ता के प्रति अर्पित कर दूँ।
संसार के उच्चतम शिखर (हिमालय) की हिम (बर्फ) से ढकी शिला मानो अपने को धुला धुला कर हमारे लिए एक पवित्र सरिता के रूप में बह निकलती है – और सरिता? वह भी सदियों से पथ्थरों शिलाओं को तोड़ती हुई, प्राणियों को सुख देती हुई अन्त में सागर में मिलकर अपना अस्तित्व खो देती है।
यह भी एक महान निष्काम कर्म है।
हे प्रभु, शीतल हेम कणों का एक कण मुझे भी बना लो, अपने मधुर अमृत रस से पूर्ण मानस रूपी सिंधु में मिलने वाली एक सरिता मुझे भी बना लो – मैं भी जीवन यात्रा में चलते चलते प्राणियों को सुख प्रदान कर अन्ततः तुम्हारे गंभीर मानसरोवर में चिरविश्राम प्राप्त कर लूँ – निष्कामता के अमृत का एक घूँट पी लूँ – याचना है।
विश्व की यह अनुपम सौन्दर्य से युक्त तुम्हारी बनाई प्रतिमा के रंगीले चित्र देख कर – एवं इंद्रधनुषी के सजीले स्वरुप में चित्रित कोमल रंगों को देखकर व्याकुलता भरे मन से सहसा वाणी फूट पड़ती है – प्रभु इन गहरे फीके रंगों का एक बिंदु मुझे भी बना लो – मैं भी अपने लघु कृत्यों से जीवन को सुन्दर बना लूँ।
पावस का मेघ जब गंभीर गर्जन करता है तो उसमें तुम्हारे मल्हार के संगीत की गुंजन का ही आभास मिलता है – मन में तीव्र उत्कंठा होती है ‘प्रभु मेरे बेसुरे संगीत का गीत भी उसमें मिला लो तो शायद उसमें भी मधुरता आ जाय -”
इन भावों की व्यग्रता ने ‘याचना” नामक गीत की कुछ पंक्तियाँ लिखने को मुझे बाध्य किया-
याचना गीत
भक्ति गंगा की लहर में श्वास मेरे भी मिला दो
प्रेम निर्झर के स्वरों में प्राण मेरे भी मिला दो
शिखर गिरी की हिम शिला धुल धुल कर धारा बह चली
शुभ्रा शीतल हिम कणों का एक कण मुझको बना दो
सरस सरिता सिंधु से मिलकर के जीवन खो रही
मधुर मानस सिंधु की सरिता मुझे भी तुम बना लो
विश्व प्रतिमा के रंगीले, इन्द्र धनुष के सजीले
चित्र तेरा ही रंग लिए
गहरे फीके इन रंगों का एक बिंदु मुझे बना दो
मेघ गर्जन में तेरा संगीत गुंजित हो रहा
बेसुरे संगीत का यह गीत भी उसमें मिला लो।
-कमला मायर
March 1st, 1994
(76th birthday)