10. नैया बंधी रही
नैया बंधी रही
हम ढूंढ फिरे जग सारा, कोई मिला न खेवन हारा,
ढूंढ ढूंढ कर हारे, कोई मिला न खेवन हारा,
नैया बंधी रही इस तट पर, गहरी नदिया धारा,
कोई मिला न —
नदिया पार दिखे एक दीपक टैर न किसी से टारा,
खड़े खड़े मल रहे हाथ, कोई दिखे न मारग चारा
कोई मिला न—
पहर पहर कर दिवस बिताया ढूंढ ढूंढ जग हारा,
आई निशा कुछ नजर न आवे, जोर जोर से पुकारा,
वन में ढूँढा, नगर में ढूँढा, ढूंढ लिया जग सारा,
दिवस, मास और बरस बिताए, बीता जीवन सारा —
घर में ढूँढा, मंदिर में ढूँढा, छोड़ा न कोई दुआरा,
पुस्तक पलटी, पोथी पलटी, मिला न कोई विचारा—
थैली लेकर निकले हाथ में, कोई दिखा न ऐसा बजारा,
सोने, चांदी से नहीं बिकता, वो रत्न है ऐसा न्यारा—
ष्वास बाँध, बैठे पद्यासन उसका राह निहारा,
कोई न दिखे, कोई न आवे, चार तरफ़ अँधियारा—
याचक बन कर, नैन मूँद जब, विषयों को खेदा मारा,
जगमग ज्योति जगी घट भीतर, आया खेवन हारा—
हुआ उजियारा
-कमला मायर