15. नाम-सुमिर

नाम-सुमिर

तू नाम सुमिर, प्रभु नाम सुमिर,

जग में आना होगा कब फिर।

जग में जब कुछ काम करे तू,

निष्काम भाव से कर तू उसको,

साथ ही आश्रय नाम सुमिर।

नाम की महिमा अति ही न्यारी,

उत्तम फल को देने वाली,

सफल करे यह जीवन को फिर।

मानव चोला दिया प्रभु ने,

करने धर्म के कर्म जगत में,

क्यों इसको भूला जाता फिर।

तन को तू करता नित उज्जवल,

मन को भी तू करले निर्मल,

रूप बनेगा अति सुन्दर फिर।

-कमला मायर