16. उदयानं ते पुरुष—
उदयानं ते पुरुष—
ये मानव जनम अमोल है तू इसे न व्यर्थ गँवा देना,
कर कर के धर्म के कर्म तू इसको उत्तम बना देना,
कर के दूषित कर्म तू इसको न दाग लगा देना।
बड़े बड़े तप करके भी इसको पाना है मुश्किल,
तू यज्ञ दान तप त्याग से सुन्दर इसे बना देना।
सत्संग ध्यान और चिंतन इसको सदा ही उच्च बनाते हैं,
स्वाध्याय और प्रभु गान से तू इसे पवित्र बना देना।
जो दीं दुःखी भूखा प्यासा द्वार तेरे पे आये कभी,
अपनी थाली उसके आगे रख उसकी भूख मिटा देना।
कर मात पिता की सेवा, आदर कर सब गुरु जनों का,
करके पूजा इनकी तू आशीर्वाद कमा लेना।
कर्म न कोई करना ऐसा जो इनको दुःख पहुंचाये,
इनका सुख अपना मान कर दुनियां में कीर्ति कमा लेना।
-कमला मायर