18. भजन (दाता तेरे द्वारे)
भजन
दाता तेरे द्वारे पर कितने भिखारी आए हैं।
पाने को भिक्षा ये खाली झोली लाए हैं।।
कितने बरस बीते इनको भूख प्यास के मारे हैं,
मांज, धो कर चमका कर ये अपने कमंडल लाए हैं—
त्रिविध ताप से पीड़ित हैं ये इनका जीवन है दुष्वार,
अमृत भिक्षा पाने को ये तेरे द्वारे आए हैं—
सुना था तुम हो दीन बंधु और कृपा के सागर हो,
कृपा आपकी पाकर अपना जीवन बनाने आए हैं—
भटक रहे थे इधर उधर ये प्यास न इनकी बुझती थी,
चातक बनकर स्वाति बूँद ये तुमसे पाने आए हैं—
राग द्वेष और ईर्ष्या तेरे पास न आने देते थे,
सीधा मारग सुन करके ये तेरी शरण में आए हैं—
नहीं हैं इनके पास मेवे, फूल, पत्र चढ़ाने को,
अपनी श्रद्धा, प्रेम को ये तुम्हे चढ़ाने आए हैं–
प्रेम और प्यार ने ही इनको बाँधा, खींच तेरी ओर,
जीव मात्र का प्रेम ये तुम्हे चढ़ाने आए हैं —
-कमला मायर