19. चरणों की दासी
चरणों की दासी
अपने चरणों की दासी बना लीजिए,
अपने चरणों में मुझको बिठा लीजिए।
नाम सुनकर तुम्हारा मैं आन खड़ी,
लगी आगे है भक्तों की पंक्ति बड़ी,
मुझ निराश को आशा बंधा दीजिए।
अपने चरणों —
तीन तापों ने रोकी है मेरी डगर,
मैं घबराती देखूं इधर और उधर,
मुझे सीधा सा मारग दिखा दीजिये।
अपने चरणों—
इधर ठंडी बयारों के झोंके लगें,
उधर वर्षा उपल के थपेड़े लगें,
अपने हाथ का छत्र लगा दीजिये।
अपने चरणों—
मैं कब से हूँ व्याकुल खड़ी ही खड़ी,
ऊंचे स्वर से पुकारूँ तुम्हे हर घड़ी,
मुझे खींच के आगे बिठा दीजिए।
अपने चरणों—
मोह माया के परदे ने रोका मुझे,
कुछ न सूझे मैं पाऊँ कैसे तुझे,
सूरदास की भक्ति मीरा की लगन,
पूरी श्रद्धा से मन में बिठा दीजिए।
अपने चरणों—
-कमला मायर