14. भिखारिन
भिखारिन
तेरे दर पे प्रभु इक भिखारिन खड़ी,
देदो भिक्षा इसे न लगाना घड़ी—
षडरिपुओं ने पा मौका घेरा इसे,
तीन तापों ने डट कर तपाया इसे,
बाँध डाला ज़ंजीरों से इसको कड़ी—
चोर डाकुओं ने लूटा जी भर कर इसे,
रही पास न, धन और दौलत कोई,
तेरे पास है दौलत बड़ी से बड़ी,
नाम तेरा जपे ये हर, हर घड़ी—
तू है दीनों का बंधू और करुणा का सिंधु,
करता रक्षा तू अपने जनों की सदा,
भागी आई ये सुन के महिमा बड़ी,
दया करके लगा दो करुणा की झड़ी—
इंतज़ार में तेरे ये दुर्बल हुई,
क्षण क्षण ये देखती तेरा मारग,
दो सहारा इसे न गिर जाए खड़ी—
-कमला मायर