26. मनुवा
मनुवा-
मनुवा काहे रहियो भुलाई,
लाल रतन एक मन से छूटा,
देवे नाहिं दिखाई।
मनुवा—
वन में ढूँढूँ बाघ में ढूँढूँ,
दाल से पूछूं पात से पूछूं,
पुष्प देत मुस्काई।
मनुवा—
नगर नगर और डगर डगर के,
पथिकन पूछूं जाई,
पथिक मेरी बात ना बूझें,
चले जात बिस्माई
मनुवा—
नदिया तीरे, घात पे उतरूं,
बूँद बूँद को गिन गिन देखूं,
रूप न देवे दिखाई।
मनुवा—
दूर शिला एक योगी बैठे,
अपना ध्यान लगाए,
दौड़, जाकर उनसे पूछूं,
‘घर ही ढूंढो जाई’
मनुवा—
-कमला मायर