33. अवगुण दूर करो
अवगुण दूर करो-
प्रभु मेरे अवगुण दूर करो,
अवगुण रहते गुण नहिं आवें,
दोनों संग न रहियो।
अवगुण्णं की गाँठ बाँध कर,
सीस धरे मैं फिरो।।
प्रभु—
मिलना चाहूँ मैं प्रभु तुमसे,
आगे पाँव न परो,
ले पाथर की नाव भारी
चाहूँ सिंधु तरो।
प्रभु—
माला लेकर करूं मैं समिरन,
दोष न मन से तरो,
सब विषयन को संग लेकर,
चाहूँ मैंतुम्हेँ सिमरो।
प्रभु—
जप तप साधन रीति न जानो,
परोपकार कभी न कियो,
बिना पंख मैं उड़ना चाहूँ,
फिर फिर भूमि गिरो।
प्रभु—
न कोई संगी न सहारे,
भटकत जग में फिरो,
याचना करूं मैं प्रभु कर जोरे,
शीश पे किरपा हस्त धरो।
प्रभु—
-कमला मायर