34. तुम्हारी शरण
तुम्हारी शरण-
हम
तुम्हारी शरण आये हैं दयानिधि,
तुम बिन कौन सहाय हमारे,
भाव सागर में आन घिरे हैं,
तुम बिन कौन पार उतारे।
हम—
भर भर दोष अनेक थके हैं,
अब चला न जाये बिन सहारे,
कान सुनें न भक्ति की बातें,
नैन न देखें मार्ग तुम्हारे।
हम —
अंग अंग की सब शक्ति खोई,
अब बल देदो हम हैं हारे,
तुम तो हो प्रभु बड़े करुणानिधि,
करके कृपा अब हमें उभारे।
हम—
याचना सबसे कर कर हारे,
कोई न आया पास हमारे,
तुम्हारी शरण में आन पड़े हैं,
तुम स्वामी हम दास तुम्हारे।
हम—
-कमला मायर