3. वंदना 1
वंदना
जगदीश करुणा रूप करूणा के तुम्ही भंडार हो
जग को रचते पालते तुम सृष्टि के आधार हो
जल और थल नभ अंतरिक्ष में दिगदिशाओं में रमे
तुम ईश हो परमेश हो सब प्राणियों के प्राण हो
अज्ञान तम घेरे खड़ा मारग न कोई सूझता
दो ज्ञान मेधा बुद्धि का तुम ज्ञान परिवार हो
हों दूर दुर्गुण दुरित सारे, मांगते भिक्षा यही
मन में हमारे सद्गुणों की बहती गंगाधर हो
हरो दीन दुखियों की दीनता, और कष्ट मिट जावें सभी
तुम डूबतों को तारते, करते बड़े उपकार हो
जग ढूंढता तुम्हे जंगलों में, पर्वतों की कंदरों में
मिलते तुम्ही हो उस जगह जहां प्रेम और प्यार हो
करते नमन करते स्मरण हम ईश ईश पुकारते
चरणों में दे दो स्थान, ये ही प्रार्थना स्वीकार हो
-कमला मायर