45. स्वामी तुम्ही हो
स्वामी तुम्ही हो-
स्वामी तुम्ही हो सारे जगत के,
तुमने ही जगत रचाया है।
तुम्ही करते पालन इसके,
तुम ही ने इसको सजाया है।। स्वामी
ऊंचे पर्वत, नदियाँ , झरने,
जग को शीतल करते हैं।
रंग रंग के फूल सभी
नैनों में सुख भरते हैं।
तुम ही देते रंग रूप इन्हें
तुमने यह बाग़ लगाया है।। स्वामी
सूरज चाँद सितारों में भी,
ज्योति तुम्हारी ख़लकती है।
जग को देकर जो प्रकाश,
अंधकार को मिटते हैं।
चमक चमक कर इन सब ने,
पर उपकार का पाठ पढ़ाया है।। स्वामी
प्रातः सांझ पक्षी मिलकर,
तुम्हारी महिमा गाते हैं।
मधुर राग उनका सुन सुन कर ,
मानव शिक्षा पाते हैं।
तू उसकी स्तुति कर ले प्राणी,
जिसने ये संगीत सिखाया है। । स्वामी
-कमला मायर