50. भजन की बेला
भजन की बेला-
भजन की बेला न व्यर्थ गंवाओ,
मानुष तन और मन है मिला जो,
उसको प्रभु के ध्यान लगाओ। भजन
यह जगत है प्रभु की सुन्दर रचना,
सबसे उत्तम मानव का चोला।
तन तो सब प्राणी ही संजोते,
मन से तो मानव तुम्ही बनाओ। भजन
कंचन सी काय पानी दुर्लभ,
इसे सजाना सुन्दर कर्मों से।
दूरितों से इसे रखना दूर,
इसमें न कोई दाग़ लगाओ। भजन
मानव तन है कर्म की भूमि,
जितना हो इससे कर्म कमाओ।
पर उपकार प्रभु का सुमिरन,
आलस में न इसे डुबाओ। भजन
-कमला मायर