53. बान सीख ले

बान सीख ले-

बान सीख ले शुभ कर्मों की, शुभ कर्मों की,

प्रातः उठ कर हो जा निर्मल,

करके संध्या यज्ञ तू, कर जग के काम।

प्रभु को रख कर अपने मन में,

छोड़ उसी पर फल की आस।।  बान सीख ले

इश्वर है तेरा रक्षक सदा सदा,

वही है पूर्ण दया का धाम।

उस पर ही तू रख भरोसा,

उद्दम से न हार।। बान सीख ले

छोड़ आलस को, हो जा तू तैयार,

मार्ग तेरे होंगे सुगम सब।

लग जायेगा जब अपने काम,

पूर्ण करेंगे वो ही तेरे सब ही काम। बान सीख ले

अपने स्वार्थों से ऊपर उठकर,

ध्यान रख औरों के हिट का भी।

परोपकार और ओउम सिमरन से,

बड़ा न कोई धर्म का आधार।  बान सीख ले

-कमला मायर

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