54. हे प्रभु
हे प्रभु-
हे प्रभु, आँखों में ज्योति देना,
और हाथों में देना शक्ति,
तब चाहे आयु देना सौ वरह की।
अँधेरा हो दूर सारा,
आँखों का और मन का।
गुण गाती रहूँ, सुमिरन करती रहूँ,
ऐसी शक्ति मेरे तन को देना। हे प्रभु
गीत लिखती रहूँ तेरी महिमा के सदा,
गाती रहूँ, सबको सुनाती रहूँ,
ऐसा बल और संगीत मुझको देना। हे प्रभु
तेरा नाम जन्म जन्म तक न भूलूँ,
निशदिन और पलछिन जपती रहूँ।
गात मेरे जन-जन का करे दूर अँधेरा,
ऐसी मेधा बुद्धि मुझको देना। हे प्रभु
-कमला मायर