70. करबद्ध करें विनती
करबद्ध करें विनती-
करबद्ध करें विनती तुमसे,
निज प्रेम की बहा दो धार।
नित स्नान करें शीतल तन हो,
अमृतरस से भर जायें प्राण।। करबद्ध
तुम्हारी महिमा का न कोई पाए पार,
सूरज, चाँद दिन-रात बनाए तुमने।
प्रात उषा और संध्या बेला में,
पक्षी भी करें तुम्हारा गुणगान।। करबद्ध
नित आकर भानु नमन करे तुमको,
नित सांझमें चमकें असंख्य रतन।
तुम भरते चांदी सोने से गगन,
गिन पायें न कोई तुम्हारे उपकार।। करबद्ध
तुम मात-पिता हो सब जग के,
तुम भ्रात और बंधू हो हम सबके।
तुममें यह जगत समाया है,
तुम रमे हुए प्रति जीवन में।। करबद्ध
तुमसे ही बिनती करते हम,
दे दो कृपा का अपनी दान।
भर कर झोली हम ले जायें,
फिर भक्ति करें दिन रात।।
-कमला मायर