73. युग युग से पुकार रहे
युग युग से पुकार रहे-
युग युग से पुकार रहे हम तुमको,
हे जगती के पूर्ण प्राण।
तुमसे ही पाये जग जीवन,
तुम्ही सब का करते कल्याण। युग युग से
दिन पर दिन बीते जाते हैं,
कब होगा जीवन का उद्धार?
लोभ, मोह, मत्सर और द्वेष,
हमें नीचे ही खींचते जाते हैं। युग युग से
यह दुर्लभ मानव का है तन,
यह ज्ञान-बुद्धि से परिपूरित मन।
जाये बन इससे अपना जीवन,
ऐसा जीवन देकर करो उद्धार। युग युग से
तुमसे ही बल पा-पा कर,
ऋषियों ने किया जीवन पूर्ण।
उनसा ही बना दो प्रभु हमें,
तेरे याचक हम, तेरी संतान। युग युग से
-कमला मयार