74. कर दो कृपा
कर दो कृपा-
कर दो कृपा देवों के देव,
तुम को हम न भूलें कभी।
जैसी तुम दो बिद्धि हमें,
वैसे कर्म करें हम सभी। कर दो
तुम तो हो सविता- देव प्रभु,
सबके रक्षक सबके पालक।
सत्प्रेरक हो हर प्राणी के,
पा कृपा तुम्हारी न भटकें कभी। कर दो
बिन कृपा जग के सुख सारे,
हम को न आनन्दित करने पाते।
कृपा कटाक्ष पाते ही,
सुख पा जांय अभी-अभी। कर दो
धरती के कण-कण में व्यापक,
लघुतम जीवों के रक्षक।
सङ्कट में पड़े प्राणी को,
उभारो वह पुकारे जभी। कर दो
-कमला मायर