77. घर घर दीप जले

घर घर दीप जले-

घर घर दीप जले। घर घर दीप जले।

दूर हो सारे जग का अँधेरा,

ज्ञान की ज्योति जले। घर घर दीप जले।

 

ईश की वाणी हैं गहरा सागर,

इसमें सुन्दर रत्न भरे।

ऋषियों ने चुन चुन रतन संजोये,

वेदों का रूप धरे।। घर घर दीप जले।

 

वेद की वाणी हैं सुन्दर बगिया,

जिसमें रङ्ग-रङ्ग फूल खिले।

जिनकी सुगन्धि जग में फैले,

सबमें आनंद भरे।। घर घर दीप जले।

 

यह वाणी हैं सुन्दर छाया,

शीतल कर दे सबकी काया।

भ्रम रोग

भव ताप को दूर करे।। घर घर दीप जले।

 

वेद-मृचाएँ गा गा कर के,

संध्या हवन प्रतिदिन कर के,

इद्न्न्मम्  के भाव को ले कर,

जीवन यज्ञ करें।। घर घर दीप जले।

 

ईश का नाम ध्यायें निशदिन,

इसका ही नित  जाप करें।

शत शत बार नमन कर कर के,

मन में भक्ति भरें।। घर घर दीप जले

 

-कमला मायर

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