78. गीत गाने जा रही हूँ

गीत गाने जा रही हूँ-

गीत गाने जा रही हूँ, इनमें अपना राग भर दो।

दीप ले कर आ रही हूँ, इनमें अपनी ज्योति भर दो।। गीत

नभ से छूटी रश्मियाँ, देती हैं जग भर को उजाला /

मेरे मन के तारकों को, अपनी रजत किरणों से भर दो।। गीत

नेत्र जल बन जाय दर्पण, पाकर चमके तुम्हारी आभा।

शुद्ध निर्मल उसके ताल में, अपनी ही तुम कांटी भर दो।। गीत

नेत्र- गोलक के कमण्डल ले, मानती तुमसे हूँ भिक्षा।

प्यास बुझ जाय इनकी, इनका स्वाति बिन्दु भर दो।। गीत

चातकों सी प्यास ले, तप्त हैं ये नयन दो।

तृप्त हो जाँय शीतल, इनको दया के रास से भर दो।। गीत

-कमला मायर

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