79. गीत जितने भी मैं गाऊं

गीत जितने भी मैं गाऊं-

गीत जितने भी मैं गाऊं, राग सबमें हो तुम्हारा।

शब्द जितने मैं संजोऊँ,स्वर लिए हों वे तुम्हारा।।  गीत

कविता मधुर बन जाये मेरी, सौंदर्य ले कर तुम्हारा।

भाव बनते जाँय निर्मल, शिवम् का ले कर सहारा।। गीत

सत्य, शिव, सौन्दर्य पूरित, कल्याणमय हो भाव सारा।

सब गुणों से पूर्ण हो कर, काव्य बन जाये तुम्हारा।। गीत

रङ्ग ले उन पुष्पों का, जिनमें खिला हो हास तुम्हारा।

सौरभ उनका फैले चहुँ दिश, जैसे सूर्य का आलोक सारा।। गीत

ईश दे दो, शक्ति प्रतिभा, तार छेड़ें मन वीणा के।

उनसे निकले जो मधुर स्वर, संगीत बन जाये तुम्हारा।। गीत

-कमला मायर

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