85. तुम हो पालन हार

तुम हो पालन हार-

प्रभु जी तुम हो पालन हार,

आन बैठे हम तुम्हारे द्वार।

पड़े हैं हम शरण तुम्हारी,

तुम ही हो अब राखन हार।। प्रभु जी

तुम हो स्वामी अन्तर्यामी,

जानो सबके मन की बात।

जप-साधन हम कुछ नहिं जानें,

न किया कोई परउपकार। प्रभु जी

भवसागर में नैया डोले,

जितना खेऊं उतना डोले।

अब तो करो कृपा हे स्वामी,

बन जाओ तुम पतवार। प्रभु जी

न माँगूँ धन और धरनी,

न किसी की और सहाय।

अब तो अपनी शरण में रख लो,

खोल दो भक्ति का द्वार। प्रभु जी

-कमला मायर

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