7. अनुपम ज्योति
अनुपम ज्योति
जग में हीरा गया खोवाई,
जग में हीरा गया हेराई ।
नगर भी ढूंढा, गाँव भी ढूंढा,
ढूंढी सारे गाँव की गलियां,
दे दे ऊंची दुहाई ।
जग में—
तीर्थ में ढूंढा, ग़ुफ़ा में ढूंढा
ढून्ढ ढून्ढ कर सुध बुध खोई
सब से पूछूं कोई देओ पता बताई ।
जग में—
घर में ढूँढा, मंदिर में ढूँढा,
कहीं न उसकी छाया पाई,
कोना कोना झाड़ बुहारी,
जाने कहाँ रहा लुकाई ।
जग में–
बहार से जब भीतर आई,
आँख मूँद जब देखन लागी,
अनुभव एक अनूठा देखा,
याचना ने अनुपम ज्योति पाई।
जग में—
-कमला मायर