20. कितनी दूर किनारा
कितनी दूर किनारा
साथी कितनी दूर किनारा,
खेते खेते नौका भारी,
थक चुके हैं हाथ मेरे,
और फूली सांस मेरी,
दिखता न कोई वार पारा।
गहरी नदिया नाव पुरानी,
बोझा इस पर है घना,
आओ साथी हाथ पकड़ो,
और दो मुझ को सहारा।
पापों दुरितों ने मिल कर इस पर,
अपना बोझा खूब डाला,
चप्पू खेते पुराने हो गए,
नैया का है न कोई सहारा।
कर दें इसको इतना हल्का,
बोझा उतारें फेकें जल में,
देखो सरपट नाव चलेगी,
और दिखेगा पास किनारा
-कमला मायर