24. स्तुति

स्तुति-

तू ही ब्रह्मा, तू ही विष्णु,

तू परम परमेश्वर,

तू ही सोम तू ही इंद्र,

तू वरुण प्राणदा – तू ही—

जगत कर्त्ता, जगसंहरर्त्ता, स्वयं प्रकाशक, तेज धर्त्ता,

बल प्रदाता, आत्मदा -तू ही—

तू ही जनक, तू ही जननी, बंधू बांधव सर्व सखा,

जग विधाता, जग नियंता, सर्वप्रेरक, सुखदा – तू ही—

दुःख विनाशक, भय निवारक,

अघ खंडन, और जन मन रंजन,

वन्दना करूं मैं, बुद्धि दीजे, ज्ञान दीजे,

भक्ति दीजे मोक्षदा – तू ही—

-कमला मायर

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