25. कामना
कामना-
जब जब घिरें गहन गहन नभ पर,
घहर घटा, श्यामल जगती तल,
तड़ित व्योम को करे विकम्पित,
पारावार ह्रदय उद्वेलित,
उर्मिमालाओं से विचलित,
करूं तुम्हारा ही चिंतन।
बाह्य जगत से हो संघर्षण,
उर में हो पीड़ा का व्रण,
मानस में हो झहर, घर,
उन्मीलित हों रक्त नयन,
करूं पान तुमसे स्वाति बिंदु।
-कमला मायर