32. दीन बन्धु
दीन बन्धु-
दीन बंधी दीनानाथ हम आए तुम्हारे द्वारे,
अशरण शरण भक्तन के रखवारे —दीन बन्धु
त्रयप्रताप पीड़ित जन तुम्हारे,
अमृत रास के दो फुवारे—दीन बन्धु
नित्य निरंजन, भवभय भंजन,
दुःख विनाशक हैं नाम तुम्हारे,
नाम अपने की लाज राखो,
भक्त जन कब से पुकारे—दीन बन्धु
गहरे सागर नैय्या डोले,
नाहिं कोई सहारे,
हाथ पकड़ कर प्रभु उभारो,
पार लगाओ बन पतवारे— दीन बन्धु
-कमला मायर