46. सुमिरन की पतवार
सुमिरन की पतवार-
सुमिरन की पतवार ले ले, सुमिरन का आधार ले ले,
उमरिया बीती जा रही, उमरिया बीती जा रही।
सुमिरन की पतवार ले ले,
तेरी नैया डगमगा रही।। सुमिरन
आंधी और तूफ़ान उठे हैं,
नैया को डुबाने वाले।
नाम का सम्बल हाथ में ले ले,
नादिया बहती जा रही।। सुमिरन
दिन दिन प्रति दिन, प्रति पल छिन छिन,
नैया में जल भरता जाये।
जल से नैया भारी हो कर,
नीचे नीचे जा रही।। सुमिरन
हिंसक जंतु भर जाएँ इसमें,
प्रतिपल भारी होती जाए।
गठरी उतार कर, जिसने कर ली हल्की,
सरपट तैरती जा रही।। सुमिरन
-कमला मायर