71. सुमिरन का तार
सुमिरन का तार-
सुमिरन का तार न टूटने पाये,
पग में चाहे कितने कांटे चुभें।
ज्यों ज्यों सङ्कट घेरे मन को,
त्यों त्यों सुमिरन में लग जायें। सुमिरन
त्रयताप सताएं जब मन को,
और जब दिखे न कोई सहारा।
ओउम की मूरत मन में बिठा कर,
इसके ही जपन में लग जाएँ। सुमिरन
ओउम ही है एक ऐसा मंत्र,
अक्षर-अक्षर में इसके अर्थ भरे।
सब ऋषि मुनि तरे इसे ध्या कर,
हम जीवन में इसे जपते जायें। सुमिरन
सब मिलकर जब करें उच्चारण,
उसकी ध्वनि गूंजे चहुँ ओर,
हो ओउम-मई मंडल सारा,
दुःख दूर हो सुख आ जाये। सुमिरन
-कमला मायर