72. लगन लग जाय

लगन लग जाय-

ऐसी लगन लग जाय स्वामी,

और कहीं न भागे मन।

निश-दिन पल पल छिन छिन भी,

गुण गायें तुम्हारे ही स्वामी। ऐसी लगन

जीवन हो ध्यान से पूर्ण हमारा,

तुम्हारी कृपा न मिलती ध्यान बिना।

जग जीवन बने न ज्ञान बिना,

दर्शन मिले न कृपा बिना स्वामी। ऐसी लगन

जिसने तन मन से है ध्यान किया,

उसने सदा जीवन सुख पाया।

उसके ही हुए दुःख दूर सभी,

उसे जीवन का आधार मिला। ऐसी लगन

भर भर अंजलि पिया प्रेम रास,

टूटी न उसकी धार कभी।

यह प्रेम है अक्षय सिंधु महान,

भरा ही रहे, अमृत इसमें स्वामी। ऐसी लगन

-कमला मयार

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