76. भिक्षुक हैं

भिक्षुक हैं-

भिक्षुक हैं हम तुम्हारे दर के,

तुम ही हो स्वामी दातार।

भिक्षा देकर विपति हरो,

हम कब से रहे पुकार। भिक्षुक हैं

जानें सब, तुम हो जननी जग की,

और सभी के हो तुम पालन हार।

बिन मांगे तुम इतना देते,

तुम्हारे भरे रहें भण्डार। भिक्षुक हैं

अन्न-धन, गोधन, और भाँति भाँति के,

देते रहते तुम ही हो दान।

तुम्हारी कृपा बिन सारा जग,

हो जाये निरधार। भिक्षुक हैं

भिक्षुक बन कर खड़े द्वार पर,

मांगें न वैभव का संसार।

सब कुछ पा जायें दाता,

यदि दे दो अपनी कृपा और प्यार। भिक्षुक हैं

-कमला मायर

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