82. हम आए शरण तुम्हारी
हम आए शरण तुम्हारी-
हम आए शरण तुम्हारी,
प्रभु सुन लो हमारी पुकार।
जग के कर्त्ता, जग के स्वामी,
तुम हो सबके पालन-हार।। हम
लाख चौरासी भुगत भुगत कर,
पाया हैं मनुज आकार।
जग की चलती आंधी में,
भूले हैं हम तुम्हारा प्यार।। हम
हम हैं दीन तुम्हारे आगे,
तुम ही हो दया के भण्डार,
दीन बन्धु है नाम तुम्हारा,
गुणों की बहा दो गंगाधार।। हम
युगों युगों के हम हैं प्यासे,
तुम ही करुणा सिंधु अपार।
करुणा बिन्दु बरसा बरसा कर,
कर दो जीवन का उद्धार।। हम
-कमला मायर